Sunday, March 9, 2025

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा उसकी आपातकालीन याचिका खारिज किए जाने के बाद तहव्वुर राणा ने भारत प्रत्यर्पण को रोकने के लिए एक नया आवेदन दायर किया।

 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के मुख्य आरोपी तहव्वुर राणा ने भारत में अपने प्रत्यर्पण पर रोक लगाने के लिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स के समक्ष एक नया आवेदन प्रस्तुत किया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस एलेना कगन के माध्यम से 6 मार्च, 2025 को स्थगन के लिए राणा के आपातकालीन आवेदन को खारिज कर दिया, जिससे उसके प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो गया। पाकिस्तान में जन्मे कनाडाई नागरिक राणा का दावा है कि अगर उसे भारत प्रत्यर्पित किया जाता है तो उसे यातना और गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है, इसके लिए उसने अपनी मुस्लिम पहचान, पाकिस्तानी मूल और पाकिस्तानी सेना में पिछली सेवा का हवाला दिया है।



मुख्य बिंदु:

प्रत्यर्पण अस्वीकृति: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस एलेना कगन के माध्यम से 6 मार्च, 2025 को स्थगन के लिए राणा के आपातकालीन आवेदन को खारिज कर दिया।

नवीनीकृत आवेदन: अस्वीकृति के बाद, राणा ने तुरंत मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स के समक्ष एक नया आवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें उसके प्रत्यर्पण पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया।


स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ: राणा का दावा है कि उसे कई गंभीर बीमारियाँ हैं, जिनमें दिल का दौरा, पार्किंसंस रोग, मूत्राशय कैंसर का संदिग्ध द्रव्यमान और क्रोनिक किडनी रोग शामिल हैं, उनका तर्क है कि भारत को प्रत्यर्पित करना "वास्तविक रूप से" मौत की सज़ा होगी।


यातना का जोखिम: राणा का तर्क है कि पाकिस्तानी मूल के मुस्लिम के रूप में उनकी पहचान और पाकिस्तानी सेना में उनकी पिछली सेवा के कारण भारत में उनके साथ दुर्व्यवहार का उच्च जोखिम है।


कानूनी तर्क: राणा की कानूनी टीम ने ह्यूमन राइट्स वॉच 2023 वर्ल्ड रिपोर्ट का हवाला दिया है, जो भारत सरकार को "बढ़ती हुई सत्तावादी" के रूप में वर्णित करती है और धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुसलमानों के खिलाफ व्यवस्थित भेदभाव को उजागर करती है।


भारत सरकार का रुख: भारत सरकार राणा के प्रत्यर्पण पर दृढ़ है और आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि प्रत्यर्पण राष्ट्रपति ट्रम्प की टिप्पणियों और फरवरी में प्रधान मंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान अपनाए गए संयुक्त बयान के अनुरूप है।


पृष्ठभूमि: लश्कर-ए-तैयबा (LeT) को भौतिक सहायता प्रदान करने की साजिश रचने और 2008 के मुंबई हमलों में उसकी भूमिका के लिए राणा को अमेरिका में दोषी ठहराया गया था। उसे 14 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी, जिसे वह 2023 में पूरा करेगा, उसके बाद निगरानी में रिहाई होगी।


प्रत्यर्पण संधि: प्रत्यर्पण 1997 में हस्ताक्षरित भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि पर आधारित है, जो किसी भी देश में गंभीर अपराधों के आरोपी या दोषी व्यक्तियों के प्रत्यर्पण की अनुमति देता है।


अगले कदम:

मुख्य न्यायाधीश रॉबर्ट्स का निर्णय: नवीनीकृत आवेदन अब मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स के हाथों में है, जो तय करेंगे कि प्रत्यर्पण पर रोक लगाई जाए या इसे आगे बढ़ने दिया जाए।


भारतीय कार्रवाई: यदि राणा को भारत प्रत्यर्पित किया जाता है, तो राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) उसे हिरासत में लेगी और मुकदमा शुरू करेगी। NIA ने राणा और सात अन्य के खिलाफ पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर दिया है, जिसमें उन पर हत्या, सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश और आतंकवादी कृत्य करने की साजिश का आरोप लगाया गया है।

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