Friday, June 7, 2024

शून्य आविष्कार

 प्राचीन बक्षाली पाण्डुलिपि में, जिसका कि सही काल अब तक निश्चित नहीं हो पाया है परन्तु निश्चित रूप से उसका काल आर्यभट्ट के काल से प्राचीन है, शून्य का प्रयोग किया गया है और उसके लिये उसमें संकेत भी निश्चित है। २०१७ में, इस पाण्डुलिपि से ३ नमूने लेकर उनका रेडियोकार्बन विश्लेषण किया गया। इससे मिले परिणाम इस अर्थ में आश्चर्यजनक हैं कि इन तीन नमूनों की रचना तीन अलग-अलग शताब्दियों में हुई थी- पहली की २२५ ई॰ – ३८३ ई॰, दूसरी की ६८०–७७९ ई॰, तथा तीसरी की ८८५–९९३ ई॰। इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिल पा रहा है कि विभिन्न शताब्दियों में रचित पन्ने एक साथ जोड़े जा सके।


इस प्राचीन मंदिर में मिलता है 'शून्य' का सबसे पहला अभिलेख, रिसर्च के लिए आते हैं बड़े बड़े शोधकर्ता

माना जाता है. यहां प्राचीन भारत के शून्य से जुड़े रहस्य से पर्दा हटाती एक कहानी भी है. इस अभिलेख को देखने के लिए विदेशों से भी कई बड़े गणितज्ञ और शोधकर्ता आते हैं.

No comments:

Post a Comment

लोकसभा में वक्फ बिल पर विपक्ष बनाम सरकार।

 लोकसभा में इस समय वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर गहन बहस चल रही है, जिसमें सरकार और विपक्ष इसके गुण-दोष और निहितार्थों पर तीखी राय व्यक्त कर...